अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 'अमरीका फ़र्स्ट' की अपनी नीति के तहत जो ट्रेड वॉर छेड़ा है, क्या उसका सबसे बड़ा शिकार टिम कुक की कंपनी एप्पल बनी है?
एप्पल के भविष्य को लेकर निवेशकों में चिंता है और ये चिंता तब साफ़ तौर पर सामने आ गई जब न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में गुरुवार को निवेशकों में एप्पल का शेयर बेचने की होड़ सी मची रही. देखते ही देखते कंपनी का शेयर 10 फ़ीसदी लुढ़क गया और कारोबारी सत्र के दौरान संभलना तो दूर शेयर तक़रीबन 10 फ़ीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ.
स्टॉक एक्सचेंजों में शेयरों का चढ़ना-गिरना तो को रोज़मर्रा की बात है, लेकिन एप्पल के शेयर के लुढ़कने जो कारण बताया जा रहा है, वह वाक़ई चिंता में डालने वाला है. न सिर्फ़ एप्पल के निवेशकों के लिए बल्कि उन सभी निवेशकों और देशों के लिए जो ट्रंप के ट्रेड वॉर की मार झेल रहे हैं.
दरअसल, कंपनी ने 2019 की पहली तिमाही में 93 अरब डॉलर की आय का अनुमान लगाया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 89 अरब डॉलर और एक बार फिर संशोधित करते हुए 84 अरब डॉलर कर दिया.
यूँ तो भारत में भी इंफ़ोसिस और टाटा कंसल्टेंसी जैसी आईटी कंपनियां भी अपनी गाइडेंस का अनुमान समय-समय पर बदलती रहती हैं, लेकिन एप्पल के मामले में ये अलग इसलिए था कि पिछले डेढ़ दशक में पहली बार एप्पल ने अपनी कमाई का अनुमान घटाया है.
तो क्या निवेशक सिर्फ़ कंपनी की कमाई घटने से परेशान हो गए हैं?
विश्लेषक इससे इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते. उनके मुताबिक़ निवेशकों में घबराहट की असल वजह थी कंपनी के मुख्य कार्यकारी टिम कुक का वो बयान जिसमें उन्होंने आशंका जताई थी कि अमरीका के चीन के साथ ट्रेड वॉर के चलते आईफ़ोन की बिक्री में गिरावट आई है और इसके जल्द थमने की उम्मीद भी नहीं है.
कंपनी के मुख्य कार्यकारी टिम कुक ने निवेशकों को लिखे पत्र में कहा कि कुछ प्रमुख उभरते बाज़ारों में हमारे सामने चुनौतियां बढ़ी हैं. अमरीका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव से चीन में बनते आर्थिक हालात आने वाले समय में भी हमें प्रभावित करेंगे.
चीन की अर्थव्यवस्था में धीमापन तो एक वजह है ही एक और कारण ये भी बताया जा रहा है कि चीन की कंपनी हुवावेई की मुख्य वित्त अधिकारी मेंग वांझोऊ की कनाडा में गिरफ्तारी के बाद एप्पल को चीन में विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
चीन क्यों है अहम
टिम कुक ने निवेशकों को भेजे अपने ख़त में लिखा है कि वो वैश्विक आर्थिक हालात को तो नहीं बदल सकते, लेकिन कंपनी अपनी सेवाओं, वेयरबल्स और मैक कारोबार से राजस्व बढ़ाने पर ज़ोर देगी.
कुक ने कहा, "चीन की अर्थव्यवस्था में 2018 की दूसरी छमाही में धीमापन आना शुरू हुआ. जुलाई-सितंबर तिमाही में चीनी सरकार ने जीडीपी विकास दर का जो आंकड़ा बताया वो 25 सालों में सबसे कम है. हमारा मानना है कि चीन और अमरीका के बाच व्यापारिक तनाव से वहां हालात आगे भी और मुश्किल होंगे."
ग्रेटर चाइना यानी चीन, हॉन्गकॉन्ग और ताइवान का एप्पल की कमाई में तक़रीबन 20 फ़ीसदी योगदान रहा है और इसमें कमी आने का सीधा असर कंपनी पर पड़ना लाज़मी है.
बाज़ार विश्लेषक और दिल्ली स्थित एक रिसर्च फ़र्म में एनालिस्ट आसिफ़ इक़बाल का भी मानना है कि एप्पल का अपने कारोबार के लिए ट्रंप के ट्रेड वॉर पर उंगली उठाना नया ट्रिगर साबित हो सकता है.
वह कहते हैं, "एप्पल ने अपनी गाइडेंस में कमी की घोषणा की और उसके कुछ ही देर बाद अमरीका का जो मैन्युफैक्चरिंग डाटा आया है वो पिछले दो साल में सबसे कम है. इसे पहला संकेत माना जा सकता है कि ट्रंप का ट्रेड वॉर अमरीका के लिए भी भारी पड़ सकता है. यानी अब ट्रंप का ट्रेड वॉर बैक फ़ायर कर रहा है."
अमरीका में विनिर्माण गतिविधियों को मापने वाले आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स में तेज़ गिरावट आई है. गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर में 62.1 के मुक़ाबले ये 51.1 के स्तर तक पहुँच गया है.
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक़ पिछले 35 सालों में इस इंडेक्स में इतनी बड़ी गिरावट नहीं आई. इससे पहले, अक्तूबर 2001 में 5.4 अंक गिरा था, जबकि अक्तूबर 2008 में ये गिरावट तक़रीबन 9 अंकों की थी.
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