ख़ुशनुमा दिन था. चटख़ धूप खिली हुई थी. हवा से बसंत की आमद का पैग़ाम मिल रहा था.
मैं, मेलबर्न में अपनी मरीज़ एंजेला (काल्पनिक नाम-असली नाम पहचान छुपाने की ग़र्ज़ से नहीं बताया जा रहा) को गलियारे से अपने कमरे की तरफ़ जाते देख रही थी.
एंजेला कई साल से मेरी मरीज़ थी. लेकिन, उस सुबह मैंने महसूस किया कि चलते वक़्त उसके पैर कांप रहे थे. उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था.
ऐसा लग रहा था कि चलते वक़्त उसके चेहरे पर एक झटका सा लगने का एहसास दिख रहा था. तब, मैंने एंजेला को एक न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाने की सलाह दी.
एक हफ़्ते के भीतर ही एंजेला का पार्किंसन्स की बीमारी का इलाज चलने लगा. मैंने, ख़ुद को बहुत कोसा कि मैं एंजेला की इस बीमारी को पहले क्यों नहीं भांप सकी.
ये बड़ी आम सी बात हो गई है. उनके मर्ज़ का पता तभी लग पाता है, जब उनमें किसी बीमारी के लक्षण साफ़ दिखने लगें.
शरीर के संकेत डॉक्टरों को आगाह करते हैं कि कुछ गड़बड़ है.
अगर कुछ ऐसा हो कि मर्ज़ को पहले ही भांप लिया जाए, तो मरीज़ों को जल्द इलाज देकर बहुत सी तकलीफ़ों से बचाया जा सकता है.
उनके मर्ज़ को और बिगड़ने से भी रोका जा सकता है. अब नई तकनीक से इस बात की उम्मीद बंधने लगी है.
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से मरीज़ों और डॉक्टरों को आने वाले वक़्त में सेहत बिगड़ने के अंदेशे से आगाह किया जा सकता है.
कई बार तो मर्ज़ की चेतावनी कई साल पहले भी दी जा सकती है. रॉस डॉसन पेशे से फ्यूचर एक्सप्लोरेशन नेटवर्क के भविष्यद्रष्टा हैं.
रॉस डॉसन कहते हैं, "भविष्यवाणी करते हैं कि स्वास्थ्य की देख-रेख का मौजूदा सिस्टम बदलने वाला है. अभी हम बीमारी होने पर उसका इलाज करते हैं."
"पर, वक़्त ऐसा आने वाला है जब संभावित बीमारी के प्रति पहले ही आगाह कर दिया जाएगा और हो सकता है कि उस बीमारी को विकसित होने से ही रोक दिया जाए."
"आज लोग लंबी उम्र जीना चाहते हैं. सेहतमंद रहना चाहते हैं. आज हमारे मेडिकल केयर सिस्टम से और बेहतर इलाज की उम्मीद की जा रही है."
"इस अपेक्षा की वजह से ही इलाज के तौर-तरीक़ों में बदलाव आ रहा है."
आज आंकड़ों के एल्गोरिद्म और नई तकनीक की मदद से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस हमें ये बता सकता है कि आने वाले वक़्त में हम किस बीमारी के शिकार हो सकते हैं.
हमारे शरीर में आने वाले बारीक़ बदलावों को आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस किसी डॉक्टर के मुक़ाबले बहुत पहले से पकड़ सकता है.
इन शारीरिक संकेतों की मदद से मर्ज़ के बारे में भविष्यवाणी की जा सकती है. आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से आज दिल के धड़कने की रफ़्तार मापी जा सकती है.
इससे सांस लेने की प्रक्रिया, शरीर की चाल-फेर और हमारी सांसों में मौजूद केमिकल तक की निगरानी की जा सकती है.
फिर इनके आधार पर नई तकनीक, हमें किसी होने वाली बीमारी के प्रति आगाह कर सकती है.
इसके लिए हमें किसी बीमारी के लक्षण दिखने तक का इंतज़ार करने का जोखिम लेने ज़रूरत नहीं रहेगी.
ऐसा होने की सूरत में डॉक्टर हमें सावधान कर सकेंगे कि हम अपने रहन-सहन में क्या बदलाव लाएं, जिससे वो बीमारी हो ही नहीं.
सबसे ज़्यादा हौसला बढ़ाने वाली बात ये है कि नई तकनीक, हमारे शरीर के उन संकेतों को भी पढ़ सकती है, जो आम डॉक्टर की निगाह में नहीं आ पाते.
Wednesday, January 30, 2019
Tuesday, January 22, 2019
तालिबान के हमले में कैसे एक बेड ने बचाई पायलट की जान
लगभग एक साल पहले यूनानी पायलट वेसिलिओस अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल के एक मंहगे होटल में रुके थे. ये वही होटल था, जहां बीते साल 20 जनवरी को तालिबान ने हमला किया था. इस हमले में 40 लोगों की मौत हुई थी.
होटल का नाम है इंटरकॉन्टिनेंटल. ये होटल विदेशी सैलानियों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है और यही कारण है कि तालिबान ने इसे निशाना बनाया.
वेसिलिओस हमले वाली रात काबुल के इसी होटल में थे और उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाई.
सुनिए उनकी कहानी उन्हीं की ज़ुबानी.
मैं उस दिन शाम 6 बजे ही अपने दोस्त के साथ डिनर के लिए निकला था. शाम 7.30 बजे हम खाना खा कर लौटे थे और इसके बाद मैं अपने कमरा नंबर 522 में लौटा.
रात 8 बजकर 47 मिनट पर मैं फ़ोन पर बात कर रहा था कि तभी मैंने लॉबी में एक धमाके की आवाज़ सुनी. मैं बालकनी में निकला और देखा कि खून से लथपथ एक शख़्स ज़मीन पर गिरा हुआ है और गोलियों की आवाज़ ज़ोर-ज़ोर से आ रही थी.
मुझे लगा कि मैं रेस्टोरेंट में नहीं हूं और ये मेरी खुशकिस्मती है और किसी भी परिस्थिति में मुझे अपनी जान बचानी है.
मैंने तुरंत अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और कमरे की चादर, तौलिए और कपड़ों को जोड़कर एक रस्सी बनाई जिसकी मदद से मैं ज़रूरत पड़ने पर चौथी मंज़िल पर जा सकूं. एक पायलट होने के नाते मैंने 'क्राइसिस मैनेजमेंट' की ट्रेनिंग ले ली थी.
पांचवीं मंजिल से कूद कर जान बचाना मेरे लिए संभव नहीं था. मैंने ख़ुद को समझाया कि अंदर रह कर ही अपनी जान बचाई जा सकती है. मैंने कमरे की लाइट बुझा दी और पर्दे या सोफ़े के पीछे छिपने का फ़ैसला किया.
लगभग डेढ़ घंटे बाद हमलावर तीसरे और चौथी मंजिल पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने रेस्टोरेंट, लॉबी और पहली-दूसरी मंजिल पर मौजूद लगभग सभी लोगों की जान ले ली थी. मैं उनके तेज़ी से बढ़ते क़दमों को महसूस कर सकता था.
पांचवीं मंजिल पर वे सबसे पहले 521 नंबर कमरे में दाखिल हुए. ये मेरे कमरे के बिल्कुल बगल का कमरा था, लेकिन तभी अचानक लाइट चली गई.
अब वे मेरे कमरे की ओर आए. मैंने अपने दरवाजे पर गोलियों की आवाज़ सुनी. मेरे कमरे में दो पलंग थे. एक पलंग के गद्दे को मैंने दरवाजे पर लगा दिया था, लेकिन एक सिंगल बेड था जिस पर गद्दा रखा हुआ था, मैं उसी के नीचे छिप गया.
गोलियों से मेरे कमरे का लॉक तोड़ते हुए चार लोग अंदर दाखिल हुए. एक हमलावर दौड़ कर बालकनी में गया क्योंकि मेरी बालकनी का दरवाजा खुला हुआ था.
कमरे में गोलियां चल रही थीं मुझे लगा कि चंद मिनट में मैं मर जाऊंगा. उन लोगों ने मेरे कमरे का दरवाजा खोले रखा और एक हमलावर बार-बार मेरे कमरे में आता और लॉबी में चला जाता.
इसके बाद वो पांचवीं मंजिल के बाकी कमरों की ओर चले गए. मुझे लगता है कि उन्होंने सभी कमरों में मौजूद लोगों को गोलियों से भून दिया था. हमलावर ज़ोर-ज़ोर से हंस रहे थे, मानो जैसे उनके लिए ये खेल हो.
सुबह लगभग तीन बजे उन्होंने पांचवीं मंजिल पर आग लगा दी. जब 20-25 मिनट तक कोई आवाज़ नहीं आई तो मैं बेड नीचे से बाहर निकला.
मैंने देखा कि कमरे के दूसरे बेड को उन लोगों ने उठाकर देखा था कि कहीं कोई उसके नीचे तो नहीं छिपा है.
थोड़ी ही देर में आग का धुंआ मेरे कमरे में आने लगा. मैं बालकनी में निकला कि तभी फिर गोलियां चली. मैं फिर कमरे में भागा और वहां मौजूद फ्रिज से पानी और दूध की बोतल निकाली.
मैंने अपनी शर्ट के छोटे-छोटे टुकड़े किए और उन्हें नाक में लगाया ताकि वे फ़िल्टर का काम करें. इसके बाद मैंने बाकी कपड़े के टुकड़ों को दूध और पानी में डुबो कर मुंह में भर लिया, ताकि धुआं कम से कम जाए.
इसके बाद हमलावर मेरे कमरे में फिर आ गए और उनमें से एक वहीं बैठ गया जिस बेड के नीचे मैं छिपा हुआ था.
अगले दिन सुबह सेना के लोगों ने गोलीबारी शुरू की. सुबह 9 बजकर 25 मिनट पर मैंने कुछ गोलियों की आवाज सुनी और मुझे लगा ये सेना की जवाबी फ़ायरिंग है. 9 बजकर 30 मिनट से लेकर 11 बजकर 15 मिनट के बीच सेना ने होटल पर कई ग्रेनेड दागे.
वो कमरा नंबर 521 में फ़ायरिंग कर रहे थे और कुछ गोलियां मेरे कमरों में भी चलाई जा रही थीं. लगभग 11 बजकर 40 मिनट पर किसी ने अफ़गानी ज़ुबान में ''पुलिस-पुलिस'' की आवाज़ दी, लेकिन मैं फिर भी बाहर नहीं निकला.
साढ़े ग्यारह बजे मुझे लगा कि मेरे बगल के कमरे में कोई पुलिस कर्मी था. 10-20 सेकेंड बाद कुछ लोगों ने 'पुलिस-पुलिस' आवाज़ लगाई और मैं ये सुनकर बाहर निकला.
मुझे देखते ही उन लोगों में से एक चिल्लाया- ज़मीन पर ही रहो. वे मुझे हमलावरों में से एक समझ रहे थे. मैंने उन्हें बताया कि मैंने कैसे अपनी जान बचाई है और मैं कैप्टन हूं. वो मुझे बाहर लाए और मेरे साथ कई लोगों को काबुल स्थित ब्रितानी बेस में लाया गया.
होटल का नाम है इंटरकॉन्टिनेंटल. ये होटल विदेशी सैलानियों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है और यही कारण है कि तालिबान ने इसे निशाना बनाया.
वेसिलिओस हमले वाली रात काबुल के इसी होटल में थे और उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाई.
सुनिए उनकी कहानी उन्हीं की ज़ुबानी.
मैं उस दिन शाम 6 बजे ही अपने दोस्त के साथ डिनर के लिए निकला था. शाम 7.30 बजे हम खाना खा कर लौटे थे और इसके बाद मैं अपने कमरा नंबर 522 में लौटा.
रात 8 बजकर 47 मिनट पर मैं फ़ोन पर बात कर रहा था कि तभी मैंने लॉबी में एक धमाके की आवाज़ सुनी. मैं बालकनी में निकला और देखा कि खून से लथपथ एक शख़्स ज़मीन पर गिरा हुआ है और गोलियों की आवाज़ ज़ोर-ज़ोर से आ रही थी.
मुझे लगा कि मैं रेस्टोरेंट में नहीं हूं और ये मेरी खुशकिस्मती है और किसी भी परिस्थिति में मुझे अपनी जान बचानी है.
मैंने तुरंत अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और कमरे की चादर, तौलिए और कपड़ों को जोड़कर एक रस्सी बनाई जिसकी मदद से मैं ज़रूरत पड़ने पर चौथी मंज़िल पर जा सकूं. एक पायलट होने के नाते मैंने 'क्राइसिस मैनेजमेंट' की ट्रेनिंग ले ली थी.
पांचवीं मंजिल से कूद कर जान बचाना मेरे लिए संभव नहीं था. मैंने ख़ुद को समझाया कि अंदर रह कर ही अपनी जान बचाई जा सकती है. मैंने कमरे की लाइट बुझा दी और पर्दे या सोफ़े के पीछे छिपने का फ़ैसला किया.
लगभग डेढ़ घंटे बाद हमलावर तीसरे और चौथी मंजिल पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने रेस्टोरेंट, लॉबी और पहली-दूसरी मंजिल पर मौजूद लगभग सभी लोगों की जान ले ली थी. मैं उनके तेज़ी से बढ़ते क़दमों को महसूस कर सकता था.
पांचवीं मंजिल पर वे सबसे पहले 521 नंबर कमरे में दाखिल हुए. ये मेरे कमरे के बिल्कुल बगल का कमरा था, लेकिन तभी अचानक लाइट चली गई.
अब वे मेरे कमरे की ओर आए. मैंने अपने दरवाजे पर गोलियों की आवाज़ सुनी. मेरे कमरे में दो पलंग थे. एक पलंग के गद्दे को मैंने दरवाजे पर लगा दिया था, लेकिन एक सिंगल बेड था जिस पर गद्दा रखा हुआ था, मैं उसी के नीचे छिप गया.
गोलियों से मेरे कमरे का लॉक तोड़ते हुए चार लोग अंदर दाखिल हुए. एक हमलावर दौड़ कर बालकनी में गया क्योंकि मेरी बालकनी का दरवाजा खुला हुआ था.
कमरे में गोलियां चल रही थीं मुझे लगा कि चंद मिनट में मैं मर जाऊंगा. उन लोगों ने मेरे कमरे का दरवाजा खोले रखा और एक हमलावर बार-बार मेरे कमरे में आता और लॉबी में चला जाता.
इसके बाद वो पांचवीं मंजिल के बाकी कमरों की ओर चले गए. मुझे लगता है कि उन्होंने सभी कमरों में मौजूद लोगों को गोलियों से भून दिया था. हमलावर ज़ोर-ज़ोर से हंस रहे थे, मानो जैसे उनके लिए ये खेल हो.
सुबह लगभग तीन बजे उन्होंने पांचवीं मंजिल पर आग लगा दी. जब 20-25 मिनट तक कोई आवाज़ नहीं आई तो मैं बेड नीचे से बाहर निकला.
मैंने देखा कि कमरे के दूसरे बेड को उन लोगों ने उठाकर देखा था कि कहीं कोई उसके नीचे तो नहीं छिपा है.
थोड़ी ही देर में आग का धुंआ मेरे कमरे में आने लगा. मैं बालकनी में निकला कि तभी फिर गोलियां चली. मैं फिर कमरे में भागा और वहां मौजूद फ्रिज से पानी और दूध की बोतल निकाली.
मैंने अपनी शर्ट के छोटे-छोटे टुकड़े किए और उन्हें नाक में लगाया ताकि वे फ़िल्टर का काम करें. इसके बाद मैंने बाकी कपड़े के टुकड़ों को दूध और पानी में डुबो कर मुंह में भर लिया, ताकि धुआं कम से कम जाए.
इसके बाद हमलावर मेरे कमरे में फिर आ गए और उनमें से एक वहीं बैठ गया जिस बेड के नीचे मैं छिपा हुआ था.
अगले दिन सुबह सेना के लोगों ने गोलीबारी शुरू की. सुबह 9 बजकर 25 मिनट पर मैंने कुछ गोलियों की आवाज सुनी और मुझे लगा ये सेना की जवाबी फ़ायरिंग है. 9 बजकर 30 मिनट से लेकर 11 बजकर 15 मिनट के बीच सेना ने होटल पर कई ग्रेनेड दागे.
वो कमरा नंबर 521 में फ़ायरिंग कर रहे थे और कुछ गोलियां मेरे कमरों में भी चलाई जा रही थीं. लगभग 11 बजकर 40 मिनट पर किसी ने अफ़गानी ज़ुबान में ''पुलिस-पुलिस'' की आवाज़ दी, लेकिन मैं फिर भी बाहर नहीं निकला.
साढ़े ग्यारह बजे मुझे लगा कि मेरे बगल के कमरे में कोई पुलिस कर्मी था. 10-20 सेकेंड बाद कुछ लोगों ने 'पुलिस-पुलिस' आवाज़ लगाई और मैं ये सुनकर बाहर निकला.
मुझे देखते ही उन लोगों में से एक चिल्लाया- ज़मीन पर ही रहो. वे मुझे हमलावरों में से एक समझ रहे थे. मैंने उन्हें बताया कि मैंने कैसे अपनी जान बचाई है और मैं कैप्टन हूं. वो मुझे बाहर लाए और मेरे साथ कई लोगों को काबुल स्थित ब्रितानी बेस में लाया गया.
Thursday, January 10, 2019
मायावती-अखिलेश के बीच गठबंधन पर बनी बात? कल कर सकते हैं सीटों का ऐलान
आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सीटों और गठबंधन का औपचारिक ऐलान कल यानी शनिवार को हो सकता है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती लखनऊ में ज्वॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान कर सकते हैं. हालांकि पेच राष्ट्रीय लोकदल(आरएलडी) को लेकर फंसा हुआ है. क्योंकि अजित सिंह की पार्टी गठबंधन में 5 सीटों की मांग कर रही है, लेकिन सपा-बसपा आरएलडी को 3 सीट देने ही पर राजी दिख रहे हैं. बता दें कि 26 साल पहले हुए गेस्ट हाउस कांड के बाद सपा-बसपा में आई दूरी के बाद यह पहला मौका है जब दोनों पार्टी के नेता एक साथ पत्रकारों के सामने बैठे दिखेंगे.
बता दें कि एसपी-बीएसपी के गठबंधन को लेकर लंबे वक्त से बातचीत चल रही थी. सपा की ओर से जारी मीडिया निमंत्रण के मुताबिक ये प्रेस कॉन्फ्रेंस लखनऊ के गोमती नगर स्थित होटल ताज में होगी. एक सप्ताह पहले ही दिल्ली में अखिलेश यादव ने मायावती से मुलाकात की थी. दोनों की यह मुलाकात डेढ़ घंटे तक चली थी. मुलाकात के बाद सूत्रों के मुताबिक ऐसी खबरें थीं कि दोनों के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो चुका है. अब केवल इसका औपचारिक ऐलान किया जाना बाकी है.
जो फॉर्मूला तैयार हुआ है, उसके मुताबिक समाजवादी पार्टी 35 सीट, बसपा 36 सीट और राष्ट्रीय लोकदल 3 सीट पर चुनाव लड़ेगी. वहीं 4 सीट रिजर्व रखी जाएंगी. इसके अलावा गठबंधन अमेठी और रायबरेली में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगा.
मायावती ने अखिलेश को किया था फोन
यूपी में अवैध खनन मामले को लेकर सीबीआई द्धारा शिकंजा कसने के बाद बसपा अध्यक्ष मायावती ने अखिलेश यादव को फोन किया था. मायावती ने इसे बीजेपी का घिनौना चुनावी षड्यंत्र करार दिया था. उन्होंने कहा था कि ये बीजेपी का पुराना हथकंडा है, जो अपने विरोधियों के खिलाफ आजमाती रहती है.
सतीश चंद्र मिश्रा और रामगोपाल यादव ने भी की थी PC
बता दें कि गोरखपुर उपचुनाव के दौरान से ही दोनों पार्टियां 26 साल की पुरानी दुश्मनी भुलाकर साथ आईं थीं. अखिलेश पर हाल ही में सीबीआई द्धारा शिकंजा कसने के बाद से बसपा पूरी तरह से उसके साथ दिखी है. सपा के महासचिव राम गोपाल यादव और बसपा के सतीष चंद्र मिश्रा ने हाल ही में ज्वाइंट प्रेस कॉन्फेंस करके बीजेपी पर करारा हमला बोला था. सतीष चंद्र मिश्रा ने अखिलेश का बचाव करते हुए कहा कि मुद्दों से भटकाने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है.
बता दें कि एसपी-बीएसपी के गठबंधन को लेकर लंबे वक्त से बातचीत चल रही थी. सपा की ओर से जारी मीडिया निमंत्रण के मुताबिक ये प्रेस कॉन्फ्रेंस लखनऊ के गोमती नगर स्थित होटल ताज में होगी. एक सप्ताह पहले ही दिल्ली में अखिलेश यादव ने मायावती से मुलाकात की थी. दोनों की यह मुलाकात डेढ़ घंटे तक चली थी. मुलाकात के बाद सूत्रों के मुताबिक ऐसी खबरें थीं कि दोनों के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो चुका है. अब केवल इसका औपचारिक ऐलान किया जाना बाकी है.
जो फॉर्मूला तैयार हुआ है, उसके मुताबिक समाजवादी पार्टी 35 सीट, बसपा 36 सीट और राष्ट्रीय लोकदल 3 सीट पर चुनाव लड़ेगी. वहीं 4 सीट रिजर्व रखी जाएंगी. इसके अलावा गठबंधन अमेठी और रायबरेली में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगा.
मायावती ने अखिलेश को किया था फोन
यूपी में अवैध खनन मामले को लेकर सीबीआई द्धारा शिकंजा कसने के बाद बसपा अध्यक्ष मायावती ने अखिलेश यादव को फोन किया था. मायावती ने इसे बीजेपी का घिनौना चुनावी षड्यंत्र करार दिया था. उन्होंने कहा था कि ये बीजेपी का पुराना हथकंडा है, जो अपने विरोधियों के खिलाफ आजमाती रहती है.
सतीश चंद्र मिश्रा और रामगोपाल यादव ने भी की थी PC
बता दें कि गोरखपुर उपचुनाव के दौरान से ही दोनों पार्टियां 26 साल की पुरानी दुश्मनी भुलाकर साथ आईं थीं. अखिलेश पर हाल ही में सीबीआई द्धारा शिकंजा कसने के बाद से बसपा पूरी तरह से उसके साथ दिखी है. सपा के महासचिव राम गोपाल यादव और बसपा के सतीष चंद्र मिश्रा ने हाल ही में ज्वाइंट प्रेस कॉन्फेंस करके बीजेपी पर करारा हमला बोला था. सतीष चंद्र मिश्रा ने अखिलेश का बचाव करते हुए कहा कि मुद्दों से भटकाने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है.
Friday, January 4, 2019
एप्पल के अलार्म से टूटेगी अमरीका-चीन ट्रेड वॉर की दीवार?
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 'अमरीका फ़र्स्ट' की अपनी नीति के तहत जो ट्रेड वॉर छेड़ा है, क्या उसका सबसे बड़ा शिकार टिम कुक की कंपनी एप्पल बनी है?
एप्पल के भविष्य को लेकर निवेशकों में चिंता है और ये चिंता तब साफ़ तौर पर सामने आ गई जब न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में गुरुवार को निवेशकों में एप्पल का शेयर बेचने की होड़ सी मची रही. देखते ही देखते कंपनी का शेयर 10 फ़ीसदी लुढ़क गया और कारोबारी सत्र के दौरान संभलना तो दूर शेयर तक़रीबन 10 फ़ीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ.
स्टॉक एक्सचेंजों में शेयरों का चढ़ना-गिरना तो को रोज़मर्रा की बात है, लेकिन एप्पल के शेयर के लुढ़कने जो कारण बताया जा रहा है, वह वाक़ई चिंता में डालने वाला है. न सिर्फ़ एप्पल के निवेशकों के लिए बल्कि उन सभी निवेशकों और देशों के लिए जो ट्रंप के ट्रेड वॉर की मार झेल रहे हैं.
दरअसल, कंपनी ने 2019 की पहली तिमाही में 93 अरब डॉलर की आय का अनुमान लगाया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 89 अरब डॉलर और एक बार फिर संशोधित करते हुए 84 अरब डॉलर कर दिया.
यूँ तो भारत में भी इंफ़ोसिस और टाटा कंसल्टेंसी जैसी आईटी कंपनियां भी अपनी गाइडेंस का अनुमान समय-समय पर बदलती रहती हैं, लेकिन एप्पल के मामले में ये अलग इसलिए था कि पिछले डेढ़ दशक में पहली बार एप्पल ने अपनी कमाई का अनुमान घटाया है.
तो क्या निवेशक सिर्फ़ कंपनी की कमाई घटने से परेशान हो गए हैं?
विश्लेषक इससे इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते. उनके मुताबिक़ निवेशकों में घबराहट की असल वजह थी कंपनी के मुख्य कार्यकारी टिम कुक का वो बयान जिसमें उन्होंने आशंका जताई थी कि अमरीका के चीन के साथ ट्रेड वॉर के चलते आईफ़ोन की बिक्री में गिरावट आई है और इसके जल्द थमने की उम्मीद भी नहीं है.
कंपनी के मुख्य कार्यकारी टिम कुक ने निवेशकों को लिखे पत्र में कहा कि कुछ प्रमुख उभरते बाज़ारों में हमारे सामने चुनौतियां बढ़ी हैं. अमरीका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव से चीन में बनते आर्थिक हालात आने वाले समय में भी हमें प्रभावित करेंगे.
चीन की अर्थव्यवस्था में धीमापन तो एक वजह है ही एक और कारण ये भी बताया जा रहा है कि चीन की कंपनी हुवावेई की मुख्य वित्त अधिकारी मेंग वांझोऊ की कनाडा में गिरफ्तारी के बाद एप्पल को चीन में विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
चीन क्यों है अहम
टिम कुक ने निवेशकों को भेजे अपने ख़त में लिखा है कि वो वैश्विक आर्थिक हालात को तो नहीं बदल सकते, लेकिन कंपनी अपनी सेवाओं, वेयरबल्स और मैक कारोबार से राजस्व बढ़ाने पर ज़ोर देगी.
कुक ने कहा, "चीन की अर्थव्यवस्था में 2018 की दूसरी छमाही में धीमापन आना शुरू हुआ. जुलाई-सितंबर तिमाही में चीनी सरकार ने जीडीपी विकास दर का जो आंकड़ा बताया वो 25 सालों में सबसे कम है. हमारा मानना है कि चीन और अमरीका के बाच व्यापारिक तनाव से वहां हालात आगे भी और मुश्किल होंगे."
ग्रेटर चाइना यानी चीन, हॉन्गकॉन्ग और ताइवान का एप्पल की कमाई में तक़रीबन 20 फ़ीसदी योगदान रहा है और इसमें कमी आने का सीधा असर कंपनी पर पड़ना लाज़मी है.
बाज़ार विश्लेषक और दिल्ली स्थित एक रिसर्च फ़र्म में एनालिस्ट आसिफ़ इक़बाल का भी मानना है कि एप्पल का अपने कारोबार के लिए ट्रंप के ट्रेड वॉर पर उंगली उठाना नया ट्रिगर साबित हो सकता है.
वह कहते हैं, "एप्पल ने अपनी गाइडेंस में कमी की घोषणा की और उसके कुछ ही देर बाद अमरीका का जो मैन्युफैक्चरिंग डाटा आया है वो पिछले दो साल में सबसे कम है. इसे पहला संकेत माना जा सकता है कि ट्रंप का ट्रेड वॉर अमरीका के लिए भी भारी पड़ सकता है. यानी अब ट्रंप का ट्रेड वॉर बैक फ़ायर कर रहा है."
अमरीका में विनिर्माण गतिविधियों को मापने वाले आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स में तेज़ गिरावट आई है. गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर में 62.1 के मुक़ाबले ये 51.1 के स्तर तक पहुँच गया है.
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक़ पिछले 35 सालों में इस इंडेक्स में इतनी बड़ी गिरावट नहीं आई. इससे पहले, अक्तूबर 2001 में 5.4 अंक गिरा था, जबकि अक्तूबर 2008 में ये गिरावट तक़रीबन 9 अंकों की थी.
एप्पल के भविष्य को लेकर निवेशकों में चिंता है और ये चिंता तब साफ़ तौर पर सामने आ गई जब न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में गुरुवार को निवेशकों में एप्पल का शेयर बेचने की होड़ सी मची रही. देखते ही देखते कंपनी का शेयर 10 फ़ीसदी लुढ़क गया और कारोबारी सत्र के दौरान संभलना तो दूर शेयर तक़रीबन 10 फ़ीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ.
स्टॉक एक्सचेंजों में शेयरों का चढ़ना-गिरना तो को रोज़मर्रा की बात है, लेकिन एप्पल के शेयर के लुढ़कने जो कारण बताया जा रहा है, वह वाक़ई चिंता में डालने वाला है. न सिर्फ़ एप्पल के निवेशकों के लिए बल्कि उन सभी निवेशकों और देशों के लिए जो ट्रंप के ट्रेड वॉर की मार झेल रहे हैं.
दरअसल, कंपनी ने 2019 की पहली तिमाही में 93 अरब डॉलर की आय का अनुमान लगाया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 89 अरब डॉलर और एक बार फिर संशोधित करते हुए 84 अरब डॉलर कर दिया.
यूँ तो भारत में भी इंफ़ोसिस और टाटा कंसल्टेंसी जैसी आईटी कंपनियां भी अपनी गाइडेंस का अनुमान समय-समय पर बदलती रहती हैं, लेकिन एप्पल के मामले में ये अलग इसलिए था कि पिछले डेढ़ दशक में पहली बार एप्पल ने अपनी कमाई का अनुमान घटाया है.
तो क्या निवेशक सिर्फ़ कंपनी की कमाई घटने से परेशान हो गए हैं?
विश्लेषक इससे इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते. उनके मुताबिक़ निवेशकों में घबराहट की असल वजह थी कंपनी के मुख्य कार्यकारी टिम कुक का वो बयान जिसमें उन्होंने आशंका जताई थी कि अमरीका के चीन के साथ ट्रेड वॉर के चलते आईफ़ोन की बिक्री में गिरावट आई है और इसके जल्द थमने की उम्मीद भी नहीं है.
कंपनी के मुख्य कार्यकारी टिम कुक ने निवेशकों को लिखे पत्र में कहा कि कुछ प्रमुख उभरते बाज़ारों में हमारे सामने चुनौतियां बढ़ी हैं. अमरीका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव से चीन में बनते आर्थिक हालात आने वाले समय में भी हमें प्रभावित करेंगे.
चीन की अर्थव्यवस्था में धीमापन तो एक वजह है ही एक और कारण ये भी बताया जा रहा है कि चीन की कंपनी हुवावेई की मुख्य वित्त अधिकारी मेंग वांझोऊ की कनाडा में गिरफ्तारी के बाद एप्पल को चीन में विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
चीन क्यों है अहम
टिम कुक ने निवेशकों को भेजे अपने ख़त में लिखा है कि वो वैश्विक आर्थिक हालात को तो नहीं बदल सकते, लेकिन कंपनी अपनी सेवाओं, वेयरबल्स और मैक कारोबार से राजस्व बढ़ाने पर ज़ोर देगी.
कुक ने कहा, "चीन की अर्थव्यवस्था में 2018 की दूसरी छमाही में धीमापन आना शुरू हुआ. जुलाई-सितंबर तिमाही में चीनी सरकार ने जीडीपी विकास दर का जो आंकड़ा बताया वो 25 सालों में सबसे कम है. हमारा मानना है कि चीन और अमरीका के बाच व्यापारिक तनाव से वहां हालात आगे भी और मुश्किल होंगे."
ग्रेटर चाइना यानी चीन, हॉन्गकॉन्ग और ताइवान का एप्पल की कमाई में तक़रीबन 20 फ़ीसदी योगदान रहा है और इसमें कमी आने का सीधा असर कंपनी पर पड़ना लाज़मी है.
बाज़ार विश्लेषक और दिल्ली स्थित एक रिसर्च फ़र्म में एनालिस्ट आसिफ़ इक़बाल का भी मानना है कि एप्पल का अपने कारोबार के लिए ट्रंप के ट्रेड वॉर पर उंगली उठाना नया ट्रिगर साबित हो सकता है.
वह कहते हैं, "एप्पल ने अपनी गाइडेंस में कमी की घोषणा की और उसके कुछ ही देर बाद अमरीका का जो मैन्युफैक्चरिंग डाटा आया है वो पिछले दो साल में सबसे कम है. इसे पहला संकेत माना जा सकता है कि ट्रंप का ट्रेड वॉर अमरीका के लिए भी भारी पड़ सकता है. यानी अब ट्रंप का ट्रेड वॉर बैक फ़ायर कर रहा है."
अमरीका में विनिर्माण गतिविधियों को मापने वाले आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स में तेज़ गिरावट आई है. गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर में 62.1 के मुक़ाबले ये 51.1 के स्तर तक पहुँच गया है.
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक़ पिछले 35 सालों में इस इंडेक्स में इतनी बड़ी गिरावट नहीं आई. इससे पहले, अक्तूबर 2001 में 5.4 अंक गिरा था, जबकि अक्तूबर 2008 में ये गिरावट तक़रीबन 9 अंकों की थी.
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