Wednesday, January 30, 2019

बीमारी होने से पहले ही चेता देगी तकनीक

ख़ुशनुमा दिन था. चटख़ धूप खिली हुई थी. हवा से बसंत की आमद का पैग़ाम मिल रहा था.

मैं, मेलबर्न में अपनी मरीज़ एंजेला (काल्पनिक नाम-असली नाम पहचान छुपाने की ग़र्ज़ से नहीं बताया जा रहा) को गलियारे से अपने कमरे की तरफ़ जाते देख रही थी.

एंजेला कई साल से मेरी मरीज़ थी. लेकिन, उस सुबह मैंने महसूस किया कि चलते वक़्त उसके पैर कांप रहे थे. उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था.

ऐसा लग रहा था कि चलते वक़्त उसके चेहरे पर एक झटका सा लगने का एहसास दिख रहा था. तब, मैंने एंजेला को एक न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाने की सलाह दी.

एक हफ़्ते के भीतर ही एंजेला का पार्किंसन्स की बीमारी का इलाज चलने लगा. मैंने, ख़ुद को बहुत कोसा कि मैं एंजेला की इस बीमारी को पहले क्यों नहीं भांप सकी.

ये बड़ी आम सी बात हो गई है. उनके मर्ज़ का पता तभी लग पाता है, जब उनमें किसी बीमारी के लक्षण साफ़ दिखने लगें.

शरीर के संकेत डॉक्टरों को आगाह करते हैं कि कुछ गड़बड़ है.

अगर कुछ ऐसा हो कि मर्ज़ को पहले ही भांप लिया जाए, तो मरीज़ों को जल्द इलाज देकर बहुत सी तकलीफ़ों से बचाया जा सकता है.

उनके मर्ज़ को और बिगड़ने से भी रोका जा सकता है. अब नई तकनीक से इस बात की उम्मीद बंधने लगी है.

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से मरीज़ों और डॉक्टरों को आने वाले वक़्त में सेहत बिगड़ने के अंदेशे से आगाह किया जा सकता है.

कई बार तो मर्ज़ की चेतावनी कई साल पहले भी दी जा सकती है. रॉस डॉसन पेशे से फ्यूचर एक्सप्लोरेशन नेटवर्क के भविष्यद्रष्टा हैं.

रॉस डॉसन कहते हैं, "भविष्यवाणी करते हैं कि स्वास्थ्य की देख-रेख का मौजूदा सिस्टम बदलने वाला है. अभी हम बीमारी होने पर उसका इलाज करते हैं."

"पर, वक़्त ऐसा आने वाला है जब संभावित बीमारी के प्रति पहले ही आगाह कर दिया जाएगा और हो सकता है कि उस बीमारी को विकसित होने से ही रोक दिया जाए."

"आज लोग लंबी उम्र जीना चाहते हैं. सेहतमंद रहना चाहते हैं. आज हमारे मेडिकल केयर सिस्टम से और बेहतर इलाज की उम्मीद की जा रही है."

"इस अपेक्षा की वजह से ही इलाज के तौर-तरीक़ों में बदलाव आ रहा है."

आज आंकड़ों के एल्गोरिद्म और नई तकनीक की मदद से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस हमें ये बता सकता है कि आने वाले वक़्त में हम किस बीमारी के शिकार हो सकते हैं.

हमारे शरीर में आने वाले बारीक़ बदलावों को आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस किसी डॉक्टर के मुक़ाबले बहुत पहले से पकड़ सकता है.

इन शारीरिक संकेतों की मदद से मर्ज़ के बारे में भविष्यवाणी की जा सकती है. आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से आज दिल के धड़कने की रफ़्तार मापी जा सकती है.

इससे सांस लेने की प्रक्रिया, शरीर की चाल-फेर और हमारी सांसों में मौजूद केमिकल तक की निगरानी की जा सकती है.

फिर इनके आधार पर नई तकनीक, हमें किसी होने वाली बीमारी के प्रति आगाह कर सकती है.

इसके लिए हमें किसी बीमारी के लक्षण दिखने तक का इंतज़ार करने का जोखिम लेने ज़रूरत नहीं रहेगी.

ऐसा होने की सूरत में डॉक्टर हमें सावधान कर सकेंगे कि हम अपने रहन-सहन में क्या बदलाव लाएं, जिससे वो बीमारी हो ही नहीं.

सबसे ज़्यादा हौसला बढ़ाने वाली बात ये है कि नई तकनीक, हमारे शरीर के उन संकेतों को भी पढ़ सकती है, जो आम डॉक्टर की निगाह में नहीं आ पाते.

No comments:

Post a Comment