उत्तर प्रदेश के झांसी से बीजेपी की सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती का एक वीडियो सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ सर्कुलेट किया जा रहा है कि 'झांसी से लोकसभा का टिकट नहीं मिलने पर उमा भारती ने मोदी सरकार की पोल खोलनी शुरू कर दी है'.
क़रीब 2 मिनट के इस वायरल वीडियो में उमा भारती नरेंद्र मोदी की आलोचना करती हुई दिखाई देती हैं.
वायरल वीडियो में उन्हें कहते हुए सुना जा सकता है कि "हिंदुत्व का एजेंडा और विकास का एजेंडा ये दो बाते हैं जो प्रोजेक्शन पूरे देश में नरेंद्र मोदी ने करने की कोशिश की है. मैं उनको 1973 से जानती हूँ. मुझे उनके बारे में अच्छी तरह से मालूम है. मैं ऐसा मानती हूँ कि वो विकास पुरुष नहीं, विनाश पुरुष हैं."
इसके बाद उमा भारती को नरेंद्र मोदी सरकार की कुछ योजनाओं की आलोचना करते सुना जा सकता है.
इस वीडियो में दिखता है कि उमा भारती के पीछे पीले रंग का एक बैनर लगा हुआ है और उनके आगे रखी हुई मेज पर प्रेस वालों के माइक बिछे हुए हैं.
बीते एक सप्ताह में इस वीडियो को फ़ेसबुक पर तीस लाख से ज़्यादा बाद देखा गया है और हज़ारों लोग इस वीडियो को शेयर कर चुके हैं.
'हरियाणा कांग्रेस व्यापार सेल', 'पक्के कांग्रेसी' और 'औवेसी फ़ैन क्लब' जैसे कुछ फ़ेसबुक पन्नों पर इस वीडियो को हज़ारों बार देखा गया है.
विकास पासवान नाम के एक फ़ेसबुक यूज़र ने भी इसी दावे के साथ ये वीडियो कुछ दिन पहले पोस्ट किया था.
पासवान के प्रोफ़ाइल से 14 हज़ार से ज़्यादा लोग इस वीडियो को शेयर कर चुके हैं और 15 लाख से ज़्यादा बार ये वीडियो देखा गया है.
लेकिन बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती के जिस वीडियो को 'झांसी के टिकट' से जोड़ते हुए शेयर किया जा रहा है, उसका आगामी लोकसभा चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है.
पिछले सप्ताह ही भारतीय जनता पार्टी ने यह घोषणा की थी कि उमा भारती 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी.
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान ये बताया था. साथ ही उन्होंने कहा था कि उमा भारती को पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने का फ़ैसला किया है.
सोशल मीडिया पर लोग उमा भारती का पुराना एडिट किया हुआ वीडियो शेयर करते हुए यह कयास लगा रहे हैं कि वो पार्टी के इस फ़ैसले से नाराज़ हैं.
लेकिन जो वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है वो साल 2007 का है. उस ज़माने में उभा भारती बीजेपी से बाहर थीं.
पार्टी की एक बैठक के दौरान उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के भाषण को बीच टोका था और फिर नाराज़ होकर बैठक से चली गई थीं. ये वाकया साल 2004 का है.
इसके बाद पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में उमा भारती को पार्टी के महासचिव के पद से हटा दिया था और उनकी भाजपा की प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी गई थी.
वायरल वीडियो में उमा भारती 'गुजरात मॉडल' की आलोचना करते हुए कहती हैं कि प्रदेश मोदी राज में ज़्यादा कर्ज़दार बना और महिलाओं की सुरक्षा से समझौता किया गया.
वीडियो में उन्हें कहते सुना जाता है कि "नरेंद्र मोदी उस गुब्बारे की तरह हैं जिसमें मीडिया ने हवा भरी है".
उमा भारती की प्रेस कॉन्फ़्रेस का ये पुराना वीडियो पहले भी कई चुनावों में बीजेपी नेता नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया जा चुका है.
साल 2015 में उमा भारती ने एक टीवी शो में अपनी इस पुरानी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बारे में ख़ुलकर बताया था और अपनी सफ़ाई पेश की थी.
उमा भारती ने कहा था, "ये बात जब मैंने बोली थी तब मैं भारतीय जनशक्ति पार्टी में थी. गुजरात के राजकोट शहर में ये प्रेस कॉन्फ़्रेंस हुई थी."
"इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद मैंने राजकोट से वडोदरा तक का सफ़र किया. मैं एक घंटे में 100 किलोमीटर से ज़्यादा पहुंच गई थी. तब मैंने वहां से घोषणा की थी कि यहाँ तो बहुत अच्छा काम हुआ है."
"राजकोट की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद मैंने जो प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी, उसमें मैंने कहा था कि हम मोदी के ख़िलाफ़ विधानसभा चुनाव-2007 में उतारे गए अपने सारे उम्मीदवार वापस लेते हैं."
कई साल तक बीजेपी से बाहर रहने के बाद साल 2011 में उमा भारती को पार्टी में वापस लिया गया था.
तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने 7 जून 2011 को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर उनकी वापसी की घोषणा की थी.
इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में नीतिन गडकरी ने कहा था कि उमा भारती की पार्टी के सिद्धांतों और संगठन में पूरी निष्ठा है और वो उत्तरप्रदेश के लखनऊ में पार्टी के प्रचार का काम संभालेंगी.
Thursday, March 28, 2019
Friday, March 22, 2019
दक्षिण कोरिया: 1600 लोगों के चुपके से बनाए गए थे अश्लील वीडियो
दक्षिण कोरिया के होटलों के कमरे में तकरीबन 1600 लोगों के चुपके से वीडियो बनाने और उसे वेबसाइट को बेचने के आरोप में अब तक चार पुरुषों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.
इन कैमरों को टीवी, हेयर ड्रायर के होल्डरों और सोकेट में लगाया गया था. इससे ये पुरुष 4.26 लाख रुपये तक कमाते थे. अगर ये लोग दोषी पाए जाते हैं तो इन्हें 10 साल तक की जेल और दो अरब रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
दक्षिण कोरिया में ख़ुफ़िया तरीक़े से अश्लीलता को फ़िल्माने का मामला काफ़ी तेज़ी से फैला था और इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन भी हुए थे.
बीबीसी से बात करते हुए कोरियाई पुलिस ने कहा है कि इन लोगों ने पिछले साल अगस्त में दक्षिण कोरिया के 10 शहरों के 30 अलग-अलग होटलों में 1 एमएम लेंस कैमरा लगाए थे.
नवंबर में एक वेबसाइट बनाई गई जो 30 सेकंड तक फ़्री वीडियो दिखाती थी और अगर पूरा वीडियो देखना है तो उसके लिए यूज़र को पैसे देने होते थे.
कथित तौर पर इन लोगों ने 803 वीडियो इस पर पोस्ट किए थे और विदेशों में वेबसाइट के सर्वर को आधार बनाकर क़ानून से बचने की कोशिश की थी.
पुलिस का कहना है कि 97 लोग इसके लिए पैसा दे रहे थे जिससे इन पुरुषों ने कमाई की. इस महीने इस वेबसाइट को बंद कर दिया गया.
सोल मेट्रोपोलिटन पुलिस एजेंसी के प्रवक्ता ने स्थानीय अख़बार कोरिया हेराल्ड से कहा, "अवैध वीडियो को पोस्ट और शेयर करने वालों से पुलिस एजेंसी सख़्ती से निपट रही है क्योंकि यह मानवीय गरिमा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है."
तेज़ इंटरनेट को बताया गया ज़िम्मेदार
चुपके से वीडियो बनाने में आई तेज़ी के लिए देश के फ़ास्ट इंटरनेट को भी ज़िम्मेदार बताया जाता है.
कई वीडियो शौचालयों और चेंजिंग रूम में बनाए जाते हैं या उन्हें बदले के तौर पर लोग पोस्ट करते हैं.
इस तरह के मामले 2012 में 2,400 थे जो 2017 में बढ़कर छह हज़ार से अधिक हो गए.
2017 में जासूसी कैमरों से संबंधित अपराधों में 5,400 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया था जिनमें से 2 फ़ीसदी से भी कम लोगों को जेल की सज़ा हुई थी.
इस तरह से वीडियो बनाने के बाद पिछले साल लोगों का गुस्सा फूटा था और राजधानी सोल में कई प्रदर्शन हुए थे. जनता ने इन मामलों के दोषियों के लिए कड़ी सज़ा की मांग की थी.
इन कैमरों को टीवी, हेयर ड्रायर के होल्डरों और सोकेट में लगाया गया था. इससे ये पुरुष 4.26 लाख रुपये तक कमाते थे. अगर ये लोग दोषी पाए जाते हैं तो इन्हें 10 साल तक की जेल और दो अरब रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
दक्षिण कोरिया में ख़ुफ़िया तरीक़े से अश्लीलता को फ़िल्माने का मामला काफ़ी तेज़ी से फैला था और इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन भी हुए थे.
बीबीसी से बात करते हुए कोरियाई पुलिस ने कहा है कि इन लोगों ने पिछले साल अगस्त में दक्षिण कोरिया के 10 शहरों के 30 अलग-अलग होटलों में 1 एमएम लेंस कैमरा लगाए थे.
नवंबर में एक वेबसाइट बनाई गई जो 30 सेकंड तक फ़्री वीडियो दिखाती थी और अगर पूरा वीडियो देखना है तो उसके लिए यूज़र को पैसे देने होते थे.
कथित तौर पर इन लोगों ने 803 वीडियो इस पर पोस्ट किए थे और विदेशों में वेबसाइट के सर्वर को आधार बनाकर क़ानून से बचने की कोशिश की थी.
पुलिस का कहना है कि 97 लोग इसके लिए पैसा दे रहे थे जिससे इन पुरुषों ने कमाई की. इस महीने इस वेबसाइट को बंद कर दिया गया.
सोल मेट्रोपोलिटन पुलिस एजेंसी के प्रवक्ता ने स्थानीय अख़बार कोरिया हेराल्ड से कहा, "अवैध वीडियो को पोस्ट और शेयर करने वालों से पुलिस एजेंसी सख़्ती से निपट रही है क्योंकि यह मानवीय गरिमा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है."
तेज़ इंटरनेट को बताया गया ज़िम्मेदार
चुपके से वीडियो बनाने में आई तेज़ी के लिए देश के फ़ास्ट इंटरनेट को भी ज़िम्मेदार बताया जाता है.
कई वीडियो शौचालयों और चेंजिंग रूम में बनाए जाते हैं या उन्हें बदले के तौर पर लोग पोस्ट करते हैं.
इस तरह के मामले 2012 में 2,400 थे जो 2017 में बढ़कर छह हज़ार से अधिक हो गए.
2017 में जासूसी कैमरों से संबंधित अपराधों में 5,400 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया था जिनमें से 2 फ़ीसदी से भी कम लोगों को जेल की सज़ा हुई थी.
इस तरह से वीडियो बनाने के बाद पिछले साल लोगों का गुस्सा फूटा था और राजधानी सोल में कई प्रदर्शन हुए थे. जनता ने इन मामलों के दोषियों के लिए कड़ी सज़ा की मांग की थी.
Thursday, March 14, 2019
अयोध्या मामले पर मध्यस्थों की पक्षकारों के साथ बातचीत, आज की पांच बड़ी ख़बरें
सुप्रीम कोर्ट की पहल के बाद अयोध्या भूमि विवाद के हल के लिए बुधवार को मध्यस्थतों ने पक्षकारों से बातचीत शुरू कर दी है.
जस्टिस एफएम इब्राहिम खलीफुल्ला की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति ने बुधवार को सभी पक्षों से इस बारे में बात की. आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू कोर्ट द्वारा गठित पैनल के सदस्य हैं.
कोर्ट के आदेश के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी गई है.
लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है, इसमें 21 नाम शामिल हैं.
16 नाम उत्तर प्रदेश और 5 उम्मीदवारों की घोषणा महाराष्ट्र के लिए की गई है.
पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को प्रत्याशी बनाने का फ़ैसला किया है. वहीं सुल्तानपुर सीट से संजय सिंह को टिकट दिया गया है.
2014 में भाजपा से जीत हासिल करने वाली सावित्री फुले को कांग्रेस ने बहराइच से टिकट दिया है.
वहीं पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को महाराष्ट्र के सोलापुर, संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त को मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से मैदान में उतारा जाएगा.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामले के मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर की 7.5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की.
जब्त संपत्तियों में होटल, मकान, जमीन, गाड़ियां, बैंकों में जमा राशि जैसी चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं.
ईडी ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की है. ब्रजेश ठाकुर पर शेल्टर होम में लड़कियों से हुए यौन उत्पीड़न से जुड़े कई आरोप हैं.
करतारपुर साहिब गलियारे के निर्माण और तीर्थयात्रियों के लिए नियम तय करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच गुरुवार को द्विपक्षीय बातचीत होगी.
यह बातचीत अटारी-वाघा सीमा पर होगी. विदेश मंत्रालय ने बुधवार को इस संबंध में बातचीत की प्रस्तावना सौंपी.
बातचीत में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के उप उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह की अगुवाई में पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल अमृतसर पहुंच चुका है.
चीन ने पाकिस्तान स्थित चरमपंथी समूह जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मौलाना मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय चरमपंथियों की काली सूची में शामिल किए जाने के प्रयास को रोक दिया है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र की आतंकियों की काली सूची में शामिल करने का प्रस्ताव पेश किया गया था.
चीन ने बुधवार को इस पर रोक लगा दी.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक सुरक्षा परिषद को दिए अपने नोट में चीन ने कहा है कि वो मसदू अज़हर पर प्रतिबंध लगाने की अपील को समझने के लिए और समय चाहता है.
ये तीसरा मौका था जब संयुक्त राष्ट्र में मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए प्रस्ताव आया था.
जस्टिस एफएम इब्राहिम खलीफुल्ला की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति ने बुधवार को सभी पक्षों से इस बारे में बात की. आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू कोर्ट द्वारा गठित पैनल के सदस्य हैं.
कोर्ट के आदेश के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी गई है.
लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है, इसमें 21 नाम शामिल हैं.
16 नाम उत्तर प्रदेश और 5 उम्मीदवारों की घोषणा महाराष्ट्र के लिए की गई है.
पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को प्रत्याशी बनाने का फ़ैसला किया है. वहीं सुल्तानपुर सीट से संजय सिंह को टिकट दिया गया है.
2014 में भाजपा से जीत हासिल करने वाली सावित्री फुले को कांग्रेस ने बहराइच से टिकट दिया है.
वहीं पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को महाराष्ट्र के सोलापुर, संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त को मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से मैदान में उतारा जाएगा.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामले के मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर की 7.5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की.
जब्त संपत्तियों में होटल, मकान, जमीन, गाड़ियां, बैंकों में जमा राशि जैसी चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं.
ईडी ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की है. ब्रजेश ठाकुर पर शेल्टर होम में लड़कियों से हुए यौन उत्पीड़न से जुड़े कई आरोप हैं.
करतारपुर साहिब गलियारे के निर्माण और तीर्थयात्रियों के लिए नियम तय करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच गुरुवार को द्विपक्षीय बातचीत होगी.
यह बातचीत अटारी-वाघा सीमा पर होगी. विदेश मंत्रालय ने बुधवार को इस संबंध में बातचीत की प्रस्तावना सौंपी.
बातचीत में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के उप उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह की अगुवाई में पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल अमृतसर पहुंच चुका है.
चीन ने पाकिस्तान स्थित चरमपंथी समूह जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मौलाना मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय चरमपंथियों की काली सूची में शामिल किए जाने के प्रयास को रोक दिया है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र की आतंकियों की काली सूची में शामिल करने का प्रस्ताव पेश किया गया था.
चीन ने बुधवार को इस पर रोक लगा दी.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक सुरक्षा परिषद को दिए अपने नोट में चीन ने कहा है कि वो मसदू अज़हर पर प्रतिबंध लगाने की अपील को समझने के लिए और समय चाहता है.
ये तीसरा मौका था जब संयुक्त राष्ट्र में मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए प्रस्ताव आया था.
Friday, March 1, 2019
#Abhinandan को लौटाने के फ़ैसले से इमरान ख़ान का क़द बढ़ा है?: नज़रिया
पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान की वायुसेना ने सरहदें पार कर एक-दूसरे के इलाक़े में घुस कर अपनी अपनी ताक़त का इज़हार किया.
इस दरम्यान पाकिस्तान ने भारत का एक मिग विमान पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मार गिराया और भारत के एक पायलट को अपने कब्ज़े में लिया. बाद में इमरान ख़ान ने भारतीय पायलट को रिहा करने की घोषणा की और कहा कि शुक्रवार को उसे भारत को सुपुर्द कर दिया जाएगा.
पुलवामा की घटना 14 फ़रवरी को हुई थी जबकि दोनों देशों की सेना के बीच हुआ ये वाकया 26 से 28 फ़रवरी के बीच का है.
इस दौरान जहां एक ओर भारत के राजनीतिक नेतृत्व की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस मसले को लेकर लगातार मुखर रहे और जब भी कैमरे से मुख़ातिब हुए उन्होंने जंग नहीं करने की बात दोहराई.
पहली बार उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच पहले हुए युद्ध और उससे मची तबाही का उदाहरण दिया तो गुरुवार को संसद में उन्होंने क्यूबा मिसाइल संकट का ज़िक्र किया (सोवियत संघ ने अमरीका के ख़िलाफ़ क्यूबा में अपनी मिसाइलें तैनात कर दी थीं).
ये वो वक़्त था जब पूरी दुनिया पर ही संकट मंडराया हुआ था क्योंकि एक तरफ अमरीका और रूस में तनातनी थी तो दूसरी ओर भारत-चीन के बीच भी युद्ध चल रहा था. इमरान लगातार कहते भी रहे हैं कि जंग किसी मसले का हल नहीं है.
लिहाज़ा, अभिनंदन को छोड़ने का फ़ैसला इमरान ख़ान का एक बहुत अच्छा कदम है. अभिनंदन ने कोई जुर्म तो किया नहीं है, वो केवल युद्धबंदी हैं, वो अपने मुल्क के लिए काम कर रहे थे लिहाज़ा उन्हें छोड़ना इमरान ख़ान का एक अच्छा राजनीतिक फ़ैसला है.
इससे पाकिस्तान और हिंदुस्तान के बीच हालात अच्छे होंगे. इस फ़ैसले से इमरान ख़ान का कद निश्चित ही बढ़ा है.
इमरान ख़ान मीडिया के सामने आते हुए कतराते नहीं हैं. जब से इमरान पाकिस्तान की राजनीति में आए हैं वो कैमरे पर आना पसंद करते हैं. वो एक अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटी रह चुके हैं, क्रिकेटर रहे हैं.
जहां क्रिकेट खेली जाती है वहां वो बेहद मारूफ़ (प्रसिद्ध) हैं. उनकी इज्ज़त है, जिसका वो फ़ायदा उठाते हैं. उनकी कम्यूनिकेशन स्किल भी अच्छी है. वो जो भी बात करते हैं उससे भी उन्हें फ़ायदा मिलता है.
वो एक जननेता हैं, जिसका वो फ़ायदा उठाते हैं और ऐसे नेता सियासत में छा जाते हैं. उसका इस्तेमाल करना हर राजनेता का हक़ है, जिसे वो समझते हैं कि उसमें वो अच्छे हैं.
इस वक़्त पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच जो हालात हैं. उसका पाकिस्तान पर बहुत असर पड़ा है और मौजूदा इमरान ख़ान सरकार यह चाहती है कि अमन होना चाहिए. वो चाहते हैं कि जो मुद्दे हैं उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए. वो ग़लतबयानी नहीं कर रहे, वो सच्चे दिल से बात कर रहे हैं.
पुलवामा की घटना के बाद उन्होंने हिंदुस्तान की उस शर्त को भी मान लिया कि सबसे पहले चरमपंथ पर बात होनी चाहिए.
पाकिस्तान पहले से ही अपनी पश्चिमी सीमा पर चरमपंथ के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहा है. कहीं न कहीं पाकिस्तान की सेना भी चाहती है कि जंग नहीं हो और बातचीत से मुद्दे को हल किया जाए.
इमरान जिस दिशा में पाकिस्तान को ले जाना चाहते हैं वो सही है. अफ़ग़ानिस्तान के साथ लड़ाई को ख़त्म करने की दिशा में उन्होंने कार्रवाई तेज़ की. वो चाहते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात सामान्य हों और जंग ख़त्म हो. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भी चाहते हैं कि यह 'न ख़त्म होने वाली लड़ाई' अब ख़त्म हो.
करतारपुर कॉरिडोर को उन्होंने सिखों के लिए खोलने की पहल की. वो चाहते हैं कि बगैर वीज़ा लिये सिख यहां आएं और दर्शन करें, यह एक अच्छी कोशिश थी.
ये वो कुछ चीज़ें हैं जो इमरान ने प्रधानमंत्री बनने के बाद की हैं और अभी उन्हें प्रधानमंत्री बने महज पांच महीने ही हुए हैं.
ऐेसे में पाकिस्तान की जो आर्थिक स्थिति है उसे उन्होंने यदि नियंत्रित कर लिया और अगले दो-तीन सालों में पाकिस्तान की ग्रोथ रेट अच्छी हो गई तब कह सकते हैं कि उन्होंने कोई काम किया है. फिलहाल तो यही कह सकते हैं कि उनके कदम सकारात्मक हैं.
इस दरम्यान पाकिस्तान ने भारत का एक मिग विमान पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मार गिराया और भारत के एक पायलट को अपने कब्ज़े में लिया. बाद में इमरान ख़ान ने भारतीय पायलट को रिहा करने की घोषणा की और कहा कि शुक्रवार को उसे भारत को सुपुर्द कर दिया जाएगा.
पुलवामा की घटना 14 फ़रवरी को हुई थी जबकि दोनों देशों की सेना के बीच हुआ ये वाकया 26 से 28 फ़रवरी के बीच का है.
इस दौरान जहां एक ओर भारत के राजनीतिक नेतृत्व की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस मसले को लेकर लगातार मुखर रहे और जब भी कैमरे से मुख़ातिब हुए उन्होंने जंग नहीं करने की बात दोहराई.
पहली बार उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच पहले हुए युद्ध और उससे मची तबाही का उदाहरण दिया तो गुरुवार को संसद में उन्होंने क्यूबा मिसाइल संकट का ज़िक्र किया (सोवियत संघ ने अमरीका के ख़िलाफ़ क्यूबा में अपनी मिसाइलें तैनात कर दी थीं).
ये वो वक़्त था जब पूरी दुनिया पर ही संकट मंडराया हुआ था क्योंकि एक तरफ अमरीका और रूस में तनातनी थी तो दूसरी ओर भारत-चीन के बीच भी युद्ध चल रहा था. इमरान लगातार कहते भी रहे हैं कि जंग किसी मसले का हल नहीं है.
लिहाज़ा, अभिनंदन को छोड़ने का फ़ैसला इमरान ख़ान का एक बहुत अच्छा कदम है. अभिनंदन ने कोई जुर्म तो किया नहीं है, वो केवल युद्धबंदी हैं, वो अपने मुल्क के लिए काम कर रहे थे लिहाज़ा उन्हें छोड़ना इमरान ख़ान का एक अच्छा राजनीतिक फ़ैसला है.
इससे पाकिस्तान और हिंदुस्तान के बीच हालात अच्छे होंगे. इस फ़ैसले से इमरान ख़ान का कद निश्चित ही बढ़ा है.
इमरान ख़ान मीडिया के सामने आते हुए कतराते नहीं हैं. जब से इमरान पाकिस्तान की राजनीति में आए हैं वो कैमरे पर आना पसंद करते हैं. वो एक अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटी रह चुके हैं, क्रिकेटर रहे हैं.
जहां क्रिकेट खेली जाती है वहां वो बेहद मारूफ़ (प्रसिद्ध) हैं. उनकी इज्ज़त है, जिसका वो फ़ायदा उठाते हैं. उनकी कम्यूनिकेशन स्किल भी अच्छी है. वो जो भी बात करते हैं उससे भी उन्हें फ़ायदा मिलता है.
वो एक जननेता हैं, जिसका वो फ़ायदा उठाते हैं और ऐसे नेता सियासत में छा जाते हैं. उसका इस्तेमाल करना हर राजनेता का हक़ है, जिसे वो समझते हैं कि उसमें वो अच्छे हैं.
इस वक़्त पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच जो हालात हैं. उसका पाकिस्तान पर बहुत असर पड़ा है और मौजूदा इमरान ख़ान सरकार यह चाहती है कि अमन होना चाहिए. वो चाहते हैं कि जो मुद्दे हैं उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए. वो ग़लतबयानी नहीं कर रहे, वो सच्चे दिल से बात कर रहे हैं.
पुलवामा की घटना के बाद उन्होंने हिंदुस्तान की उस शर्त को भी मान लिया कि सबसे पहले चरमपंथ पर बात होनी चाहिए.
पाकिस्तान पहले से ही अपनी पश्चिमी सीमा पर चरमपंथ के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहा है. कहीं न कहीं पाकिस्तान की सेना भी चाहती है कि जंग नहीं हो और बातचीत से मुद्दे को हल किया जाए.
इमरान जिस दिशा में पाकिस्तान को ले जाना चाहते हैं वो सही है. अफ़ग़ानिस्तान के साथ लड़ाई को ख़त्म करने की दिशा में उन्होंने कार्रवाई तेज़ की. वो चाहते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात सामान्य हों और जंग ख़त्म हो. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भी चाहते हैं कि यह 'न ख़त्म होने वाली लड़ाई' अब ख़त्म हो.
करतारपुर कॉरिडोर को उन्होंने सिखों के लिए खोलने की पहल की. वो चाहते हैं कि बगैर वीज़ा लिये सिख यहां आएं और दर्शन करें, यह एक अच्छी कोशिश थी.
ये वो कुछ चीज़ें हैं जो इमरान ने प्रधानमंत्री बनने के बाद की हैं और अभी उन्हें प्रधानमंत्री बने महज पांच महीने ही हुए हैं.
ऐेसे में पाकिस्तान की जो आर्थिक स्थिति है उसे उन्होंने यदि नियंत्रित कर लिया और अगले दो-तीन सालों में पाकिस्तान की ग्रोथ रेट अच्छी हो गई तब कह सकते हैं कि उन्होंने कोई काम किया है. फिलहाल तो यही कह सकते हैं कि उनके कदम सकारात्मक हैं.
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